रविवार, 16 अगस्त 2009

स्वतन्त्रता की वर्षगांठ और शाहरुख खान की सुरक्षा जांच

आज देश स्वतन्त्रता की बांसठवीं वर्षगाठं मना रहा है, चारों तरफ़ खुशी का माहौल है । इस बीच कई दिनों से सूखे पड़े मौसम में वर्षा की फ़ुहारें, कभी हल्की तो कभी तेज, महौल की खुशी को दोगुना कर रही हैं । इस साल पूरा उत्तर भारत भारी सूखे की चपेट में है, ऐसा सूखा जो कई दशकों बाद इतना व्यापक है। पिछले दो दिनो से, इस थोड़ी देर से ही सही, हो रही इस बरसात से सभी सराबोर और खुश हो रहे हैं । बीच मे जब जब मौसम थोड़ा खुल जाता है तो बच्चे अपनी पतगें लेकर बाहर निकलते हैं और जैसे ही बारिस शुरू होती है तो वापस घर मे भाग आते हैं ।
सुबह से अनेक कार्यक्रम सभी टीवी चैनेलों द्वारा प्रसारित किये जा रहे हैं । इनमे दिन भर जगह जगह मनाये जा रहे समारोहों, खासकर लालकिले से प्रधानमन्त्री द्वारा देश के नाम सम्बोधन व प्रदेशों की राजधानियों मे हुए काय्रक्रमों की झलकियों को भी दिखाया जा रहा है । इसके साथ साथ पिछले बांसठ सालों की उपलब्धियों के अलावा कमियों और इस बीच आये सामाजिक व आर्थिक परिवर्तनों पर भी चर्चायें सभी टीवी चैनेलों पर प्रसारित की जा रही हैं । चर्चाओं से यह निकल कर आ रहा है की देश ने इन सालों में लगभग हर क्षेत्र - शिक्षा, खेल, तकनीक व आर्थिक, में बहुत तरक्की की है। यह बात भी सामने आ रही है कि भारत की युवा पीढ़ी आत्मविश्वास से भरपूर है और हर तरह की चुनौतियों से विचलित हुए बिना उनका सामना करने में सक्षम है चाहे वे देश के अन्दर से समाजिक व आर्थिक क्षेत्र से हों या देश के बाहर से आतंकवाद के रूप में हो ।
ऐसा लग रहा है कि भारत अपना अज़ादी पर्व आत्मचिन्तन के साथ भविष्य की चुनौतियों का सामना करने पर विचार करने में लगा रहा है और देश का परिपक्व मीडिया कदम मिला कर आगे बढ़ रहा है, तभी टीवी स्क्रीन के स्क्रोल पर एक खबर फ़्लैश होना शुरू होती है, लगभग दोपहर के बाद "शाहरुख खान को सुरक्षा जांच के लिये अमेरिका के एअरपोर्ट पर रोका गया"। जैसे जैसे खबर डेवलप होती है पता चलता है कि आधा घटें रोका गया, जो बाद में बढ़ कर दो घटें हो जाता है । इसके साथ - साथ शुरू हो गया भारत का चिरपरिचित ’मीडिया सर्कस’ जिसका नमूना हम सब अनेकों बार देख चुके हैं ।
अब सब कुछ छोड कर पूरा मीडिया एक खबर पर होड़ लगा देता है । चीख चीख कर मामूली से हर खबर को गैरमामूली बनाने के चक्कर मे कैसे कैसे जुमले उछाले गये इनकी बानगी देखिये : शाहरुख का अमेरिका में अपमान , शाहरुख का अपमान देश का अपमान, शाहरुख से पूछ्ताछ रेशियल डिश्क्रिमिनेशन का उदाहरण और न जाने क्या क्या ।
अब सारा माहौल जो राष्ट्रीय पर्व का था बिल्कुल बदल गया, समझदारी से सर्कस बन गया । एक व्यक्ति जो भारत मे प्रसिद्ध है किन्तु किसी राजकीय प्रोटोकाल का अधिकारी नही है उसकी जांच कैसे राष्ट्रीय अपमान का विषय हो गयी यह समझ से परे है ।
आज सब जानते हैं कि सुरक्षा की क्या स्थिति है । पश्चिमी देश और खासकर अमेरिका इस मामले में कितना सतर्क है यह बताने की आवश्यकता नहीं है । उनकी सतर्कता और सख्ती का ही नतीजा है कि उनके देश में ९/११ के बाद कोई बडी घटना नही हुई । इसके विपरीत हम कितने सतर्क हैं इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आतंकवाद के हाथों दो प्रधानमन्त्री खोने के बाद भी, पिछले २५ वर्षों में कितनी आतंकवादी घटनाएं हुई हैं इसकी ठीक ठीक गिनती करना असंभव है । परन्तु हमारा एक ही नारा है ’ हम नहीं सुधरेंगे’ । ज़रा विचार कीजिए कुछ समय पहले संसद पर हमला हुआ तो देश कैसे स्तब्ध था, फ़िर पूरी जांच के बाद, सोच विचार कर सख्त सुरक्षा प्रबंध किये गये । करोड़ो के उपकरण लगाये गये । इस सब के बावजूद कभी किसी सांसद का कोई डुप्लीकेट या किसी सांसद की पत्नी बिना किसी जांच के और वैध प्रपत्र के, सुरक्षा को धता बता कर अन्दर पहुंच गये । ज़ाहिर है सुरक्षा जांच हमारे लिए एक गैरज़रूरी बाधा है । सुरक्षाकर्मी सिर्फ़ सल्यूट करने और आम आदमी को धमकाने के लिये प्रयुक्त होते हैं । यदि वे किसी वी आई पी की जांच करेंगे तो नौकरी से हाथ धो बैठेंगे । यही वजह है कि दिल्ली की सड़कों पर यदि कोई पुलिस वाला किसी खास को रोके तो जवाब मिलेगा ’ पता है मैं कौन हूं’ या ’मेरे पिताजी कौन हैं’ । कभी कभी तो बेचारे की पिटाई भी हो जाती है ।
ठीक यही व्यवस्था अब हमें पश्चिमी देशों और अमेरिका में भी चाहिये । आखिर हम वी वी आई पी जो ठहरे । अब प्रोटोकाल की सुविधा देश में और देश के बाहर भी सिर्फ़ उच्च राजकीय पदाधिकारियों को ही नहीं आगे बढ़ कर क्रिकेटरों, फ़िल्मी सितारों, टी वी वालों, पत्रकारों और थोड़े दिनों मे शायद रियलिटी शो वालों को भी चहिये होगी। और अगर न मिले तो राष्ट्रीय अपमान होगा । जैसा कि फ़िल्मी खानों मे हर बात के लिये होड़ लगती है शायद कोई दूसरा खान भी अपनी पापुलरिटी सिद्ध करने के लिये, इसी तरह का एक और हंगामा खड़ा करवाये।
जिस तरह कुछ खास एक्सपर्ट लोग और मीडिया ने माहौल बनाया है और गम्भीर चर्चाओं को दर किनार कर गैर ज़रूरी बात को ज्यादा तूल दिया है यह गैर जिम्मेदाराना, बेवकूफ़ाना और बेहूदा है । राष्ट्रीय अपमान सुरक्षा जांच से नहीं, अपने को हर नियम कानून से ऊपर मानने वाली मानसिकता से होता है । ऐसी मानसिकता को बढ़ावा देने में जुटे इस मीडिया और हर बात बेबात हंगामा करने वालों से है । आज हमें आज़ादी की इस सालग़िरह पर प्रधानमन्त्री के संबोधन को पीछे कर ’शाहरुख पुराण’ को प्राथमिकता देने के मानसिक दिवालियेपन से बचने की आवश्यकता है ।
हमारे उच्च वर्ग को चाहिये कि वे सुरक्षा जैसे मामलों पर धैर्य दिखायें और अपनी थोड़ी असुविधा को तूल न दे कर उदाहरण प्रस्तुत करें, जिन्हे आम लोग भी अपनाएगें और हम सब सुरक्षित महसूस करेगें । अन्तिम बात, छोटी छोटी बातों का बतंगड बना कर पब्लीसिटी बटोरने से भी हमारे सेलीब्रटी लोगों को बचना चाहिये, चाहे वह शाहरुख खान ही क्यों न हों।

1 टिप्पणी:

  1. 'हमारे उच्च वर्ग को चाहिये कि वे सुरक्षा जैसे मामलों पर धैर्य दिखायें और अपनी थोड़ी असुविधा को तूल न दे कर उदाहरण प्रस्तुत करें, जिन्हे आम लोग भी अपनाएगें और हम सब सुरक्षित महसूस करेगें'
    - इस घटना से हमें यह सीख लेनी चाहिए.

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